
तुअर की फसल में फूल और फलियां बढ़ाने के उपाय: किसानों के लिए बंपर पैदावार फार्मूला
तुअर की खेती में पौधों का अच्छा विकास होना ही काफी नहीं होता। असली मुनाफा तब मिलता है जब पौधों पर रिकॉर्ड तोड़ फूल आएं और वे सभी फूल मोटी फलियों में बदल जाएं। कई बार किसान शिकायत करते हैं कि उनके पौधे तो बड़े हो गए लेकिन फलियां बहुत कम लगीं। इसलिए समय रहते तुअर की फसल में फूल और फलियां बढ़ाने के उपाय जानना हर किसान भाई के लिए बेहद जरूरी है।
तुअर की फसल में फूल और फलियां बढ़ाने के उपाय क्या हैं?
फसल में फूल और फलियां बढ़ाने के लिए फ्लावरिंग स्टेज पर यूरिया डालने से बचें और एनपीके 0:52:34 का छिड़काव करें। फूलों को झड़ने से रोकने के लिए अल्फा नेफ्थाइल एसिटिक एसिड (प्लानोफिक्स) का प्रयोग करें। मिट्टी में नमी बनाए रखें और दानों को चमकदार बनाने के लिए बोरॉन के साथ एनपीके 0:0:50 का सही समय पर स्प्रे करें।
मुख्य फसल चरणों का त्वरित सारांश
- फूल आने से पहले (Before Flowering): इस अवस्था का मुख्य उद्देश्य पौधे की शाखाओं और नई कलियों की संख्या को बढ़ाना है। अधिक से अधिक शाखाएं पाने के लिए इस समय पानी में घुलनशील एनपीके (NPK) 0:52:34 खाद का छिड़काव करना सबसे फायदेमंद होता है।
- फूल आते समय (During Flowering): इस चरण की सबसे बड़ी चुनौती पौधों के फूलों को झड़ने से रोकना है। खेत में हल्की नमी बनाए रखकर प्लानोफिक्स (Alpha NAA) जैसे ग्रोथ हार्मोन का छिड़काव करने से फूलों का गिरना तुरंत बंद हो जाता है।
- फलियां बनते समय (During Pod Formation): यह अंतिम चरण दानों के आकार, वजन और उनकी चमक को बढ़ाने के लिए होता है। इस समय बोरॉन के साथ एनपीके 0:0:50 का मिश्रण स्प्रे करने से फलियां मोटी, भारी और बाजार में अधिक दाम दिलाने वाली बनती हैं।
Table of Contents
- फ्लावरिंग स्टेज पर तुअर में फूल झड़ने से कैसे रोकें?
- वैज्ञानिक तरीके से तुअर की फसल में ज्यादा फलियां कैसे लगाएं?
- सही पोषण का गणित: तुअर में फूल आने के समय खाद का चार्ट
- व्यावहारिक तकनीक: तुअर की फसल में फलियां बढ़ाने के उपाय
- अधिकतम मुनाफे के लिए तुअर की अच्छी पैदावार के लिए उपाय
- सिंचाई प्रबंधन: फूलों के समय पानी देने का सही नियम
- किसानों के सफल व्यावहारिक उदाहरण और आम गलतियां
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
फ्लावरिंग स्टेज पर तुअर में फूल झड़ने से कैसे रोकें?
तुअर की खेती में सबसे बड़ी समस्या यह आती है कि फूल आते ही वे नीचे गिरने लगते हैं। यदि आपके खेत में भी ऐसा हो रहा है, तो आपको तुरंत यह समझना होगा कि तुअर में फूल झड़ने से कैसे रोकें। फूलों के गिरने का मुख्य कारण मिट्टी में अचानक नमी का कम होना या फिर पोषक तत्वों की भारी कमी होना है।
इसे रोकने के लिए जब फसल में 10 से 15% फूल दिखने लगें, तब अल्फा नेफ्थाइल एसिटिक एसिड (जैसे बायर कंपनी का प्लानोफिक्स) का 4.5 मिलीलीटर प्रति 15 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें। यह हार्मोन पौधों में फूलों की पकड़ को मजबूत करता है। इसके साथ ही इस संवेदनशील समय पर खेत में हल्की सिंचाई जरूर करें ताकि पौधों पर सूखा तनाव (Dry Stress) न आए।
वैज्ञानिक तरीके से तुअर की फसल में ज्यादा फलियां कैसे लगाएं?
जैसे ही फूलों की संख्या स्थिर हो जाती है, हमारा अगला लक्ष्य होता है कि हर एक फूल फली में बदल जाए। अगर आप यह जानना चाहते हैं कि तुअर की फसल में ज्यादा फलियां कैसे लगाएं, तो आपको पौधों में फास्फोरस और पोटेशियम की मात्रा बढ़ानी होगी। ये दोनों तत्व फलियों के विकास के लिए सबसे मुख्य माने जाते हैं।
फूल आने की शुरुआती अवस्था में पानी में घुलनशील खाद एनपीके 0:52:34 का 1 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। इसमें मौजूद फास्फोरस फूलों की संख्या बढ़ाता है और पोटेशियम उन फूलों को स्वस्थ फलियों में बदलने में मदद करता है। वैज्ञानिक तकनीकों के बारे में अधिक अपडेट के लिए आप भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं।
सही पोषण का गणित: तुअर में फूल आने के समय खाद का चार्ट
कई किसान भाई फूलों के समय भी खेत में भारी मात्रा में यूरिया डाल देते हैं, जो कि बहुत बड़ी गलती है। दलहनी फसलों की जड़ों में खुद नाइट्रोजन बनाने वाले बैक्टीरिया होते हैं। इस समय यूरिया डालने से पौधा सिर्फ लंबाई में बढ़ता रहेगा और उस पर फलियां बहुत कम आएंगी।
सटीक नियम के अनुसार तुअर में फूल आने के समय खाद के रूप में आपको सूक्ष्म पोषक तत्वों (Micro-nutrients) पर ध्यान देना चाहिए। जब खेत में फूल बन रहे हों, तब 100 ग्राम बोरॉन (Boron 20%) को एनपीके के साथ मिलाकर स्प्रे करें। बोरॉन परागण (Pollination) की क्रिया को तेज करता है, जिससे कोई भी फूल बिना फली बने बेकार नहीं जाता।
व्यावहारिक तकनीक: तुअर की फसल में फलियां बढ़ाने के उपाय
रासायनिक खादों के अलावा कुछ बेहद आसान और व्यावहारिक तरीके भी हैं जो फलियों की संख्या बढ़ा सकते हैं। बेहतरीन तुअर की फसल में फलियां बढ़ाने के उपाय में सबसे ऊपर आता है पौधों की 3G कटिंग या ऊपरी सिरों को तोड़ना (Nipping)। जब पौधा 60 से 70 दिन का हो, तब उसके ऊपरी कोमल सिरों को हल्का सा तोड़ दें।
ऐसा करने से पौधे की ऊपर की तरफ बढ़त रुक जाती है और बगल से नई-नई शाखाएं (Branches) निकलने लगती हैं। जितनी ज्यादा शाखाएं होंगी, भविष्य में उतने ही ज्यादा फूल और फलियां लगेंगी। इसके साथ ही खेत की मेड़ों पर गेंदे के पौधे लगाने से मित्र कीट आकर्षित होते हैं जो परागण में बहुत मदद करते हैं।
अधिकतम मुनाफे के लिए तुअर की अच्छी पैदावार के लिए उपाय
रिकॉर्ड तोड़ उत्पादन पाने के लिए फसल की शुरुआत से लेकर अंत तक एक सही रणनीति अपनानी होती है। यदि हम समग्र रूप से तुअर की अच्छी पैदावार के लिए उपाय तलाशें, तो एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) सबसे जरूरी बन जाता है। इस समय फली छेदक इल्ली का हमला दानों को अंदर से खोखला कर देता है।
इल्लियों से बचाव के लिए खेत में प्रति एकड़ 5 फेरोमोन ट्रैप लगाएं और फूलों की अवस्था में रासायनिक कीटनाशकों के बजाय नीम आधारित दवाओं (नीमबाण) का इस्तेमाल करें। अगर इल्लियों का प्रकोप बहुत ज्यादा बढ़ जाए, तभी कोराजन या इमामेक्टिन बेंजोएट का छिड़काव करें। फसलों की सुरक्षा से जुड़ी सरकारी योजनाओं और एडवाइजरी के लिए आप कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के पोर्टल पर जा सकते हैं।
सिंचाई प्रबंधन: फूलों के समय पानी देने का सही नियम
तुअर की फसल में पानी देने का समय बहुत मायने रखता है। जब फसल में फूल पूरी तरह खिल चुके हों, तब बहुत तेज या भारी सिंचाई (Flood Irrigation) कभी नहीं करनी चाहिए। ज्यादा पानी मिलने से पौधे को झटका लगता है और वह अपने सारे फूल नीचे गिरा देता है।
पानी हमेशा फूल आने से ठीक पहले (कलियां बनते समय) या फिर फलियों में दाने भरते समय ही देना चाहिए। यदि आपके पास ड्रिप या स्प्रिंकलर (फव्वारा) सिस्टम है, तो इस नाजुक समय पर उसका उपयोग करना सबसे सुरक्षित और फायदेमंद साबित होता है।
किसानों के सफल व्यावहारिक उदाहरण और आम गलतियां
मध्य प्रदेश के धार जिले के रहने वाले किसान राजेश जी ने अपने एक एकड़ के खेत में यूरिया का इस्तेमाल बंद कर दिया और फूल आते समय एनपीके 0:52:34 के साथ बोरॉन का स्प्रे किया। इसके साथ ही उन्होंने शुरुआत में पौधों की निपिंग (ऊपरी सिरे तोड़ना) भी की थी। नतीजा यह हुआ कि उनकी फसल में सामान्य से 25% ज्यादा फलियां लगीं।
आम गलतियां जिनसे हर किसान को बचना चाहिए:
- फूलों के खिलने के ठीक बीच में बहुत तेज केमिकल कीटनाशकों का छिड़काव न करें, इससे परागण करने वाली मधुमक्खियां मर जाती हैं।
- दवाओं का घोल बनाते समय हमेशा साफ और मीठे पानी का ही इस्तेमाल करें, गंदे तालाब के पानी से दवाओं का असर खत्म हो जाता है।
- खेत में कभी भी पानी को रुकने न दें, तुअर के पौधों को जलभराव बिल्कुल भी पसंद नहीं होता।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
क्या प्लानोफिक्स टॉनिक को कीटनाशक दवा के साथ मिलाकर डाल सकते हैं?
हां, आप प्लानोफिक्स को अधिकांश आम कीटनाशकों के साथ मिलाकर स्प्रे कर सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे कि इसे कभी भी किसी कॉपर युक्त फंगसनाशक या सल्फर के साथ मिलाकर न डालें, वरना पत्तियां जल सकती हैं।
तुअर की फलियों में दाने छोटे क्यों रह जाते हैं?
दानों के छोटे रहने का मुख्य कारण मिट्टी में पोटाश (Potassium) और बोरॉन की कमी है। फलियां बनते समय एनपीके 0:0:50 का छिड़काव करने से दाने बड़े, वजनी और चमकदार बनते हैं।
निपिंग (ऊपरी सिरे तोड़ना) बुवाई के कितने दिन बाद करनी चाहिए?
निपिंग हमेशा बुवाई के 50 से 65 दिनों के भीतर कर लेनी चाहिए जब पौधे की ऊंचाई लगभग 2 से 2.5 फीट हो। फूल आने के बाद निपिंग करने से भारी नुकसान हो सकता है।
क्या दलहनी फसलों में जिप्सम डालना फायदेमंद होता है?
जी हां, खेत की तैयारी के समय या पहली गुड़ाई के समय जिप्सम डालने से फसल को सल्फर और कैल्शियम मिलता है, जिससे तुअर के दानों में प्रोटीन की मात्रा बढ़ती है।
एक एकड़ तुअर की फसल से औसतन कितनी पैदावार मिल सकती है?
यदि आप सही वैज्ञानिक तकनीकों और खादों का इस्तेमाल करते हैं, तो एक एकड़ से आसानी से 8 से 12 क्विंटल तक बंपर पैदावार प्राप्त की जा सकती है।
निष्कर्ष
अपनी अरहर की खेती से रिकॉर्ड तोड़ मुनाफा कमाने के लिए आपको सही समय पर तुअर की फसल में फूल और फलियां बढ़ाने के उपाय अपनाने होंगे। केवल अंधाधुंध रासायनिक खादें डालने के बजाय पौधों की निपिंग करना, फूलों के समय यूरिया रोककर पोटाश और बोरॉन का छिड़काव करना ही असली सफलता की चाबी है। अपने खेत की नियमित निगरानी करते रहें और मौसम के बदलाव के अनुसार अपनी सिंचाई का शेड्यूल तय करें।
क्या आपके खेत में भी इस साल तुअर के फूल झड़ रहे हैं? नीचे कमेंट में अपनी समस्या लिखें या अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों से तुरंत सलाह लें!