aapkikheti

धान की फसल में खरपतवार नियंत्रण कैसे करें (पूरी जानकारी)

धान की फसल में खरपतवार नियंत्रण कैसे करेंधान की फसल में खरपतवार नियंत्रण कैसे करें: बम्पर पैदावार के लिए बेस्ट तरीके

धान की फसल में खरपतवार नियंत्रण कैसे करें : धान की खेती में सबसे बड़ी समस्या अनचाहे घास-फूस यानी खरपतवारों की होती है। ये अनचाहे पौधे मिट्टी के सारे जरूरी पोषक तत्व, खाद और पानी खुद सोख लेते हैं, जिससे धान के मुख्य पौधों का विकास रुक जाता है और पैदावार आधी रह जाती है।
यह जानना बेहद जरूरी है कि धान की फसल में खरपतवार नियंत्रण कैसे करें। इसके लिए रोपाई के 3 दिनों के भीतर Pre-Emergence दवा (जैसे प्रेटीलाक्लोरे या पायरोज़ोसल्फ्यूरॉन) का छिड़काव करें। यदि खरपतवार उग चुके हैं, तो रोपाई के 20-25 दिनों बाद Post-Emergence दवा (जैसे बिस्पाईरिबैक सोडियम) का उपयोग करें और खेत में नमी बनाए रखें।

त्वरित सारांश तालिका

खरपतवार नियंत्रण का प्रकार सही समय अवधि अनुशंसित दवा / तरीका
उगने से पहले (Pre-Emergence) रोपाई के 0 से 3 दिनों के भीतर प्रेटीलाक्लोरे (Pretilachlor) या पायरोज़ोसल्फ्यूरॉन
उगने के बाद (Post-Emergence) रोपाई के 15 से 25 दिनों के बाद बिस्पाईरिबैक सोडियम (Nominee Gold) / पेनक्सुलाम
पारंपरिक जैविक तरीका रोपाई के 20 और 40 दिनों पर कोनो वीडर (Cono Weeder) मशीन या हाथ से निराई
खेत में पानी का प्रबंधन रोपाई के शुरुआती 15 दिन खेत में 3-5 सेमी पानी भरकर रखें ताकि नई घास न उगे

(विषय सूची)

धान की फसल में खरपतवार की पहचान कैसे करें?

खेत में किसी भी दवा का छिड़काव करने से पहले आपको यह पता होना चाहिए कि आपके खेत में किस तरह की घास उगी है। गलत दवा डालने से आपके पैसे बर्बाद होंगे और फसल को भी झटका लग सकता है। धान की फसल में खरपतवार की पहचान मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में की जाती है।
खरपतवारों की आसान पहचान तालिका

खरपतवार की श्रेणी मुख्य लक्षण और उदाहरण फसल पर इसका मुख्य असर
सँकरी पत्ती वाले (Grasses) इनकी पत्तियां धान जैसी ही दिखती हैं। जैसे: सावां (Echinochloa), दूब घास। ये धान के कल्ले फूटने की जगह को पूरी तरह घेर लेते हैं।
मोथा प्रजाति (Sedges) इनका तना तिकोना होता है और पत्तियां नुकीली होती हैं। जैसे: मोथा (Cyperus)। इनकी जड़ें बहुत गहरी होती हैं, जो मिट्टी की नमी सोख लेती हैं।
चौड़ी पत्ती वाले (Broad-leaved) इनकी पत्तियां गोल या चौड़ी होती हैं। जैसे: जलकुंभी, मिर्ची घास। ये पानी की सतह पर फैलकर धान की जड़ों तक धूप नहीं पहुंचने देते।

धान की फसल में खरपतवार प्रबंधन का सही विज्ञान

केवल रसायनों पर निर्भर रहना सही नहीं है। एक स्मार्ट धान की फसल में खरपतवार प्रबंधन योजना में जैविक, यांत्रिक और रासायनिक तीनों तरीकों का सही संतुलन होना चाहिए।
रोपाई से पहले खेत की अच्छी तरह गहरी जुताई करें और धूप लगने दें, जिससे पुरानी घास के बीज नष्ट हो जाएं। रोपाई के शुरुआती दो हफ्तों तक खेत में 3 से 5 सेंटीमीटर पानी का स्तर बनाए रखना सबसे बढ़िया प्राकृतिक तरीका है। पानी भरे रहने के कारण सूर्य की रोशनी नीचे जमीन तक नहीं पहुंच पाती, जिससे घास के बीज अंकुरित ही नहीं हो पाते।

धान की फसल में खरपतवार नियंत्रण कैसे करें

धान में खरपतवार नाशक का सही समय और मौसम

दवा डालते समय मौसम का मिजाज देखना सबसे जरूरी है। धान में खरपतवार नाशक का सही समय वह होता है जब सुबह की ओस पूरी तरह सूख चुकी हो, तेज हवा न चल रही हो, और कम से कम अगले 4 से 6 घंटों तक भारी बारिश की कोई संभावना न हो।
यदि आप ‘उगने के बाद’ (Post-Emergence) वाली दवा डाल रहे हैं, तो छिड़काव करने से 24 घंटे पहले खेत का सारा पानी बाहर निकाल दें ताकि दवा सीधे घास की पत्तियों पर गिर सके। दवा डालने के 48 घंटे बाद खेत में फिर से हल्का पानी भर दें, इससे दवा का असर 200% तक बढ़ जाता है।

धान में खरपतवार नियंत्रण की दवा: टॉप तकनीकी नाम

बाज़ार में कई कंपनियों की दवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन आपको हमेशा डिब्बे पर लिखे तकनीकी नाम (Technical Name) को देखकर ही दवा खरीदनी चाहिए। यहाँ धान में खरपतवार नियंत्रण की दवा की मुख्य लिस्ट दी गई है:

1. पायरोज़ोसल्फ्यूरॉन इथाइल (Pyrazosulfuron Ethyl)

यह एक रोपाई के तुरंत बाद डाली जाने वाली दवा है। रोपाई के 1 से 3 दिनों के भीतर इसका छिड़काव करने से मोथा और चौड़ी पत्ती वाली घासें शुरू में ही खत्म हो जाती हैं। इसकी मात्रा 80 ग्राम प्रति एकड़ रखी जाती है।

2. बिस्पाईरिबैक सोडियम (Bispyribac Sodium)

यह भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली दवा है। जब धान की रोपाई को 15 से 25 दिन हो जाएं और घास 2 से 4 पत्ती की हो चुकी हो, तब इसका इस्तेमाल करें। यह सावां और मोथा दोनों को जड़ से सुखा देती है। इसकी 80 मिलीलीटर मात्रा को 150 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ स्प्रे करें।

बारिश के मौसम में धान की खरपतवार रोकथाम के आपातकालीन नियम

मानसून के दौरान लगातार होने वाली बारिश के कारण दवाओं के धुल जाने का खतरा रहता है। इसलिए बारिश के मौसम में धान की खरपतवार रोकथाम करते समय कुछ विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए।

कम लागत में धान की फसल की पैदावार बढ़ाने के उपाय

खेत को खरपतवार मुक्त रखना ही धान की फसल की पैदावार बढ़ाने के उपाय में सबसे पहला और मुख्य कदम है। जब खेत साफ रहेगा, तो आपके द्वारा डाली गई यूरिया, डीएपी और जिंक सीधे धान के पौधों को मिलेगी।
दवा डालने के 5 दिन बाद, जब घास पीली पड़ने लगे, तब खेत में 30 किलोग्राम यूरिया के साथ 5 किलोग्राम जिंक सल्फेट मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें। इससे पौधों को तुरंत ऊर्जा मिलेगी, कल्ले तेजी से फूटेंगे और बालियों का आकार एक समान और वजनदार होगा।

किसानों द्वारा की जाने वाली आम गलतियां जिनसे बचना जरूरी है

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल 

धान की फसल में खरपतवार नियंत्रण कैसे करें, अगर घास बहुत बड़ी हो चुकी हो?

अगर घास 5-6 पत्ती से बड़ी हो गई है, तो रासायनिक दवाएं कम असर करेंगी। ऐसी स्थिति में पहले मजदूरों की मदद से बड़ी घास को हाथ से खिंचवाकर बाहर निकालें और फिर बची हुई छोटी घास के लिए दवा का स्प्रे करें।

क्या खरपतवार नाशक दवा डालने से धान की मुख्य फसल पीली पड़ सकती है?

हां, कुछ दवाएं डालने के बाद धान के पौधे 2-3 दिनों के लिए हल्के पीले पड़ सकते हैं या उनकी ग्रोथ रुक सकती है। इससे घबराने की जरूरत नहीं है, मौसम साफ होते ही पौधे वापस सामान्य रूप से हरे-भरे हो जाते हैं

सावां घास को नष्ट करने के लिए सबसे बेहतरीन दवा कौन-सी है?

धान में सावां (Echinochloa) को खत्म करने के लिए ‘सायहेलोफॉप ब्यूटाइल’ (Cyhalofop-butyl) या ‘बिस्पाईरिबैक सोडियम’ सबसे कारगर तकनीकी दवाएं मानी जाती हैं।

क्या खरपतवार नाशक दवा को यूरिया खाद में मिलाकर सीधे फेंक सकते हैं?

जो दवाएं ‘रोपाई के 3 दिनों के भीतर’ डाली जाती हैं (जैसे प्रिटीलाक्लोरे), उन्हें रेत या सूखी यूरिया में मिलाकर खेत में छींटा दिया जा सकता है। लेकिन बाद में डाली जाने वाली दवाओं को हमेशा पानी में मिलाकर स्प्रे ही करना चाहिए।
(निष्कर्ष)
सही समय पर लिया गया सही फैसला ही खेती में बड़ा मुनाफा देता है। यह अच्छी तरह समझना कि धान की फसल में खरपतवार नियंत्रण कैसे करें, आपकी पूरी फसल को सुरक्षा देता है और खाद-दवा के खर्च को बेकार होने से बचाता है। मानसून के मौसम में अंधाधुंध दवाएं छिड़कने की जगह खरपतवारों की सही पहचान करें, मौसम का पूर्वानुमान देखें और सही नोजल का उपयोग करके ही स्प्रे करें। अपने खेतों को साफ रखें और धान की शानदार रिकॉर्ड तोड़ पैदावार हासिल करें!
Exit mobile version