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बारिश के मौसम में जैविक कीटनाशक बनाने का तरीका (100% काम का नुस्खा)

बारिश के मौसम में जैविक कीटनाशक बनाने का तरीकाबारिश के मौसम में जैविक कीटनाशक बनाने का तरीका

बारिश आते ही हमारे पेड़-पौधे एकदम हरे-भरे और सुंदर दिखने लगते हैं। लेकिन इस मौसम में एक बड़ी मुसीबत भी साथ आती है, और वो हैं पेड़-पौधों में लगने वाले जिद्दी कीड़े और फंगस। अगर आप अपने बगीचे को बिना किसी केमिकल वाले जहर के बिल्कुल प्राकृतिक तरीके से बचाना चाहते हैं, तो आप बिल्कुल सही जगह पर आए हैं। आज हम आपको बारिश के मौसम में जैविक कीटनाशक बनाने का तरीका एकदम आसान शब्दों में समझाएंगे।
सबसे आसान और असरदार बारिश के मौसम में जैविक कीटनाशक बनाने का तरीका यह है कि आप घर पर नीम की पत्तियों को पानी में उबाल लें या फिर लहसुन और हरी मिर्च को पीसकर एक तीखा स्प्रे तैयार करें। ये घरेलू नुस्खे बारिश के दिनों में आने वाले कीड़ों, जैसे कि एफिड्स, सफेद मक्खी और रेंगने वाले कीड़ों को पौधों से दूर रखते हैं और इससे आपके गमले की मिट्टी भी खराब नहीं होती।

जैविक कीटनाशक की पूरी जानकारी (Quick Summary)

जरूरी बातें पूरी जानकारी
सबसे अच्छे घरेलू सामान नीम की पत्तियां, लहसुन, तीखी हरी मिर्च, खट्टी छाछ
किन कीड़ों पर असरदार सफेद मक्खी, कटरपिलर, छोटे काले कीड़े, फंगस
कब-कब स्प्रे करें बरसात के दिनों में हर 7 से 10 दिन में एक बार
स्प्रे करने का सही समय शाम के वक्त, जब बारिश रुकी हुई हो
कितने दिन तक रख सकते हैं ताजा बनाएं, बोतल में 1 से 2 हफ्ते तक रख सकते हैं
फायदा मिट्टी, केंचुओं और आपके परिवार की सेहत के लिए 100% सुरक्षित

 बारिश के मौसम में जैविक कीटनाशक बनाने का तरीका  (विषय सूची)

  1. बारिश में पौधों पर कीड़े क्यों ज्यादा लगते हैं?
  2. घर पर जैविक कीटनाशक कैसे बनाएं: रसोई के सामान से
  3. नीम से प्राकृतिक कीटनाशक बनाने का तरीका: स्टेप बाय स्टेप
  4. बारिश में पौधों को कीड़ों से बचाने के घरेलू उपाय: बालकनी के लिए
  5. सब्जियों के लिए ऑर्गेनिक कीटनाशक रेसिपी: घर की खेती के लिए
  6. बारिश के मौसम में फसल को कीटों से कैसे बचाएं: जरूरी टिप्स
  7. जैविक कीटनाशक डालते समय की जाने वाली आम गलतियां
  8. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

बारिश में पौधों पर कीड़े क्यों ज्यादा लगते हैं?

बरसात का मौसम आते ही हवा में नमी बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। यह उमस वाला मौसम इंसानों को भले ही परेशान करे, लेकिन पेड़-पौधों के दुश्मनों यानी कीड़ों को बहुत पसंद आता है। कई बार ऐसा होता है कि सुबह आपका पौधा बिल्कुल ठीक दिख रहा था, और शाम होते-होते उसकी पत्तियों पर छोटे-छोटे छेद हो जाते हैं। बात यह है कि बारिश के दिनों में गर्म और नमी वाले माहौल के कारण मिट्टी में छिपे कीड़ों के अंडे बहुत तेजी से फूटते हैं।
बाजार में मिलने वाले केमिकल वाले स्प्रे शुरुआत में तो बड़े अच्छे लगते हैं, लेकिन जैसे ही तेज बारिश होती है, वे बह जाते हैं। इसके अलावा, वे केमिकल हमारी मिट्टी में रहने वाले मददगार केंचुओं और अच्छे कीड़ों (जैसे लेडीबग) को भी मार देते हैं। सच तो यह है कि बार-बार केमिकल डालने से गमले की मिट्टी धीरे-धीरे बेजान हो जाती है और पौधे कमजोर होने लगते हैं।
इसीलिए, अपने गार्डन के लिए बारिश के मौसम में जैविक कीटनाशक बनाने का तरीका जानना बहुत जरूरी है। ये प्राकृतिक स्प्रे पत्तियों पर एक कड़वी परत बना देते हैं। इससे कीड़े पौधे के पास भी नहीं आते और आपके बगीचे का माहौल भी बिल्कुल सुरक्षित रहता है।

घर पर जैविक कीटनाशक कैसे बनाएं: रसोई के सामान से

अपने पौधों को बचाने के लिए आपको बाजार से महंगी दवाइयां खरीदने की कोई जरूरत नहीं है। आपकी रसोई में ही ऐसी कई चीजें मौजूद हैं, जिनकी गंध से कीड़े कोसों दूर भागते हैं। जब आप यह सोचते हैं कि घर पर जैविक कीटनाशक कैसे बनाएं, तो सबसे पहले ध्यान लहसुन और तीखी मिर्च पर जाना चाहिए।
इस तीखे स्प्रे को बनाने के लिए करीब 50 ग्राम लहसुन की कलियां और 50 ग्राम सबसे तीखी वाली हरी मिर्च ले लें। इन दोनों को थोड़े से पानी के साथ मिक्सर में डालकर एकदम बारीक पीस लें। अब इस पेस्ट को एक कांच के जार में बंद करके पूरे एक दिन (24 घंटे) के लिए छोड़ दें। ऐसा करने से लहसुन और मिर्च का तीखापन पानी में पूरी तरह घुल जाता है।
अगले दिन इस मिक्सचर को एक साफ सूती कपड़े से अच्छी तरह छान लें ताकि मिर्च का कोई भी बड़ा टुकड़ा स्प्रे बोतल में न फंसे। अब इस छने हुए पानी में एक लीटर सादा पानी मिलाएं और साथ में एक छोटा चम्मच बर्तन धोने वाला लिक्विड सोप (Dishwashing Liquid) डाल दें। यह साबुन पत्तियों पर दवा को चिपकाए रखने का काम करता है, जिससे हल्की बूंदाबांदी में भी स्प्रे धुलता नहीं है।

नीम से प्राकृतिक कीटनाशक बनाने का तरीका: स्टेप बाय स्टेप

भारत में सदियों से नीम का इस्तेमाल कीड़ों को भगाने के लिए किया जा रहा है। नीम के अंदर एक खास कड़वा तत्व होता है, जिसे कीड़े बिल्कुल बर्दाश्त नहीं कर पाते। इसे खाने के बाद कीड़ों की बढ़ने की क्षमता खत्म हो जाती है। इसलिए, नीम से प्राकृतिक कीटनाशक बनाने का तरीका हर पौधे पालने वाले को आना ही चाहिए।

नीम की पत्तियों का काढ़ा

अगर आपके घर के आसपास नीम का पेड़ है, तो दो बड़े कटोरे भरकर ताजी पत्तियां तोड़ लाएं। इन पत्तियों को दो लीटर पानी में तब तक उबालें, जब तक कि पानी का रंग गहरा हरा न हो जाए। उबालने के बाद इसे रातभर ठंडा होने के लिए रख दें। सुबह इस पानी को छानकर स्प्रे बोतल में भर लें। यह पानी घर के अंदर रखे शो-प्लांट्स के लिए बहुत बढ़िया काम करता है।

असली नीम तेल का उपयोग

अगर आपको ताजी पत्तियां नहीं मिल रही हैं, तो आप बाजार से शुद्ध नीम का तेल (Neem Oil) खरीद सकते हैं। एक लीटर हल्के गुनगुने पानी में एक चम्मच नीम का तेल और आधा चम्मच लिक्विड सोप डालें। बोतल को बहुत जोर से हिलाएं ताकि तेल और पानी आपस में अच्छे से मिल जाएं और पानी का रंग दूध जैसा सफेद हो जाए। बस, आपका असरदार स्प्रे तैयार है।

बारिश में पौधों को कीड़ों से बचाने के घरेलू उपाय: बालकनी के लिए

बालकनी गार्डन में जगह थोड़ी कम होती है और गमले बहुत पास-पास रखे होते हैं। हवा ठीक से न मिलने के कारण यहां फंगस लगने का डर सबसे ज्यादा होता है। ऐसे में बारिश में पौधों को कीड़ों से बचाने के घरेलू उपाय आपके बहुत काम आ सकते हैं।

लकड़ी की राख का कमाल

अगर आपके मनी प्लांट या फूलों के पौधों की कोमल पत्तियों को घोंघे (Snails) या स्लग खा रहे हैं, तो गमले की मिट्टी के ऊपर सूखी लकड़ी की राख छिड़क दें। राख की वजह से ये रेंगने वाले कीड़े गमले पर नहीं चढ़ पाते और आपके पौधे बच जाते हैं।

खट्टी छाछ से फंगस का इलाज

लगातार बारिश से पत्तियों पर सफेद पाउडर जैसा फंगस जमने लगता है। इसके लिए एक गिलास एकदम खट्टी छाछ या मट्ठा लें और उसे दस गिलास पानी में मिला लें। इस मट्ठे वाले पानी का छिड़काव पत्तियों पर करें। छाछ का खट्टापन फंगस को तुरंत खत्म कर देता है और पौधों को जरूरी पोषण भी देता है।

सब्जियों के लिए ऑर्गेनिक कीटनाशक रेसिपी: घर की खेती के लिए

घर की छत पर या गमले में टमाटर, मिर्च और बैंगन उगाने का अपना ही मजा है। लेकिन चूंकि इन सब्जियों को हमें खुद खाना होता है, इसलिए इन पर किसी भी तरह का केमिकल डालना बहुत खतरनाक हो सकता है। यह खास सब्जियों के लिए ऑर्गेनिक कीटनाशक रेसिपी आपके भोजन को शुद्ध रखेगी।
एक प्लास्टिक के डिब्बे में 100 मिलीलीटर ताजा गोमूत्र लें और उसमें एक लीटर साफ पानी मिला लें। गोमूत्र में प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन और अमोनिया होता है। यह पौधों के लिए एक बेहतरीन टॉनिक का काम भी करता है और इसकी तेज गंध से कीड़े सब्जियों के आसपास भी नहीं फटकते। इसे आप हर संडे अपने सब्जी के पौधों पर डाल सकते हैं।
अगर टमाटर या बैंगन के पौधों में हरी इल्लियां (Caterpillars) लग गई हैं, तो अदरक, लहसुन और थोड़ी सी हींग का पानी मिलाकर स्प्रे करें। इससे पत्तियों का स्वाद इतना कड़वा और तीखा हो जाता है कि इल्लियां तुरंत पत्तियां छोड़ देती हैं और आपका नुकसान होने से बच जाता है।

  बारिश के मौसम में जैविक कीटनाशक बनाने का तरीका फसल को कीटों से कैसे बचाएं: जरूरी टिप्स

अगर आपने अपनी छत पर बड़ा टेरेस गार्डन बनाया है या छोटे खेत में सब्जियां लगाई हैं, तो आपको कुछ बुनियादी बातों का ध्यान रखना होगा। यह जानना बहुत जरूरी है कि बारिश के मौसम में फसल को कीटों से कैसे बचाएं, क्योंकि सिर्फ स्प्रे करना ही काफी नहीं होता।
मान लीजिए आपने छत पर भिंडी के पौधे लगाए हैं। अगर आप उन्हें बारिश के दिनों में किसी अंधेरे और तंग कोने में रख देंगे, तो दो दिन के अंदर ही उन पर सफेद मक्खियों का हमला हो जाएगा। वहीं, अगर आप उन्हें खुली धूप और हवादार जगह पर रखकर हर रविवार सुबह नीम के पानी का स्प्रे करेंगे, तो एक भी कीड़ा आपके पौधों को छू नहीं पाएगा।

जैविक कीटनाशक डालते समय की जाने वाली आम गलतियां

भले ही ये घरेलू कीटनाशक बिल्कुल सुरक्षित हैं, लेकिन अगर इन्हें गलत तरीके से इस्तेमाल किया जाए, तो पौधों को नुकसान पहुंच सकता है। कई लोग सबसे बड़ी गलती यह करते हैं कि वे तेज दोपहर की धूप में पौधों पर स्प्रे कर देते हैं। इससे पत्तियां झुलस जाती हैं। हमेशा याद रखें, स्प्रे सिर्फ शाम के समय सूरज ढलने के बाद ही करना चाहिए।
दूसरी आम गलती यह है कि लोग मिक्सचर को बिना छाने ही स्प्रे बोतल में भर लेते हैं। लहसुन या मिर्च के छोटे-छोटे कण स्प्रे की नोजल को जाम कर देते हैं। इसलिए, पानी को हमेशा किसी बारीक मलमल के कपड़े या चाय छानने वाली महीन छननी से दो बार जरूर छानें।
इसके अलावा, इन घरेलू दवाइयों को महीनों तक स्टोर करके न रखें। चूंकि इनमें हम कोई केमिकल प्रिजर्वेटिव नहीं मिलाते, इसलिए ये 15 दिनों के बाद खराब होने लगती हैं और इनकी ताकत खत्म हो जाती है। हमेशा उतना ही मिक्सचर बनाएं जितना आपके गार्डन के लिए एक बार में जरूरी हो।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

क्या बारिश के तेज पानी में भी नीम तेल का स्प्रे काम करता है?
नहीं, अगर बाहर तेज बारिश हो रही है, तो स्प्रे न करें क्योंकि पानी दवा को तुरंत बहा ले जाएगा। जब बारिश रुक जाए, तब शाम के समय पौधों पर इसका छिड़काव करें ताकि यह पत्तियों पर टिक सके।
क्या गोमूत्र का स्प्रे घर के अंदर रखे पौधों पर किया जा सकता है?
गोमूत्र बहुत असरदार होता है, लेकिन इसकी गंध बहुत तेज होती है। इसलिए इसे घर के बंद कमरों में रखे पौधों के बजाय बालकनी, छत या खुली जगह पर रखे पौधों पर ही इस्तेमाल करना बेहतर होता है।
बरसात के दिनों में यह घरेलू स्प्रे कितने दिनों में डालना चाहिए?
गर्मियों में तो महीने में एक बार स्प्रे करना काफी होता है। लेकिन बारिश के दिनों में कीड़ों के पनपने की रफ्तार बहुत तेज होती है, इसलिए हर 7 से 10 दिन में एक बार स्प्रे जरूर करना चाहिए।
क्या इन घरेलू कीटनाशकों से हमारे पौधे की मधुमक्खियां मर जाएंगी?
नहीं, यह जैविक कीटनाशक कीड़ों को मारता नहीं है बल्कि अपनी कड़वाहट से उन्हें दूर भगाता है। बस ध्यान रखें कि जब पौधों पर फूल खिले हों, तो फूलों के बिल्कुल अंदर स्प्रे न करें ताकि मधुमक्खियां परेशान न हों।
क्या नीम के तेल में बेकिंग सोडा मिलाया जा सकता है?
हां, एक लीटर नीम के पानी में आधा चम्मच बेकिंग सोडा मिलाने से यह और भी ताकतवर हो जाता है। यह कीड़ों को भगाने के साथ-साथ पत्तियों पर लगने वाले काले-सफेद फंगस को भी जड़ से खत्म कर देता है।
Natural Conclusion
अपने बगीचे को हरा-भरा रखने के लिए बारिश के मौसम में जैविक कीटनाशक बनाने का तरीका सबसे सस्ता और बेहतरीन इलाज है। रसोई की साधारण चीजों जैसे नीम, लहसुन और खट्टी छाछ का इस्तेमाल करके आप बिना किसी खर्च के अपने पौधों को नया जीवन दे सकते हैं। तो फिर देर किस बात की? आज ही अपनी रसोई में जाइए, अपने पौधों के लिए पहला प्राकृतिक नीम स्प्रे तैयार कीजिए और इस पूरे मानसून अपने सुंदर गार्डन को कीड़ों से बिल्कुल मुक्त रखिए।
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