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बारिश के मौसम में फसलों में फंगस से बचाव कैसे करें – आसान तरीका

बारिश के मौसम में फसलों में फंगस से बचाव कैसे करेंबारिश के मौसम में फसलों में फंगस से बचाव कैसे करें

बरसात का मौसम आते ही चारों तरफ हरियाली छा जाती है, जो किसानों के लिए बहुत खुशी की बात है। लेकिन इस सुहावने मौसम के साथ एक बड़ी आफत भी आती है, जिसे हम फंगस, उकठा या फफूंद की बीमारी कहते हैं। हवा और मिट्टी में ज्यादा नमी होने के कारण यह बीमारी बहुत तेजी से फैलती है। आज हम आपको बिल्कुल आसान शब्दों में समझाएंगे कि बारिश के मौसम में फसलों में फंगस से बचाव कैसे करें ताकि आपकी मेहनत की कमाई बर्बाद न हो।
सबसे सरल और देसी बारिश के मौसम में फसलों में फंगस से बचाव कैसे करें, इसके लिए आपको खेत में पानी जमा होने से रोकना होगा। इसके साथ ही ताजी खट्टी छाछ का छिड़काव और ट्राइकोडर्मा जैसी जैविक फफूंदनाशक दवा का इस्तेमाल करना होगा। ये तरीके पौधों की जड़ों, तनों और पत्तियों को सड़ने से बचाते हैं और मिट्टी की ताकत को भी कम नहीं होने देते।

फंगस से बचाव की पूरी जानकारी 

जरूरी बातें काम की जानकारी
मुख्य बीमारियां जड़ सड़ना, पत्तियों पर सफेद पाउडर, झुलसा रोग
सबसे अच्छे घरेलू उपाय खट्टी छाछ, नीम का काढ़ा, लकड़ी की सूखी राख
दवा डालने का समय सुबह जल्दी या शाम को सूरज ढलने के बाद
खेत का मुख्य नियम पौधों के बीच सही दूरी रखें और पानी बाहर निकालें
सुरक्षा का स्तर मिट्टी, केंचुओं और इंसानों के लिए 100% सुरक्षित

बारिश के मौसम में फसलों में फंगस से बचाव कैसे करें (विषय सूची)

  1. बरसात में फसलों में फंगस क्यों तेजी से फैलती है?
  2. खेत में पौधों को देखकर फसलों में फंगस की पहचान कैसे करें
  3. मानसून के दिनों में आने वाले प्रमुख बारिश में फसलों के फंगल रोग
  4. सबसे सस्ता इलाज: फसलों में फंगस का घरेलू उपचार
  5. घर पर जैविक फफूंदनाशक बनाने का तरीका स्टेप बाय स्टेप
  6. बीमारी से पहले: फसलों में फंगल रोग से बचाव के उपाय
  7. सुरक्षित खेती के लिए बारिश के मौसम में फसलों की देखभाल कैसे करें
  8. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

बरसात में फसलों में फंगस क्यों तेजी से फैलती है?

लगातार होने वाली बारिश मौसम को ठंडा तो कर देती है, लेकिन हवा में उमस बहुत ज्यादा बढ़ा देती है। यह ज्यादा नमी वाला माहौल मिट्टी में छिपे हुए फंगस के छोटे-छोटे कीटाणुओं को जगा देता है। कई बार ऐसा होता है कि सुबह तक आपकी फसल बिल्कुल हरी-भरी दिख रही थी, और दो दिन के अंदर ही पत्तियां काली पड़कर सूखने लगती हैं।
बात यह है कि जुलाई और अगस्त के महीनों में फंगस को बढ़ने के लिए सबसे सही माहौल मिलता है। अगर आपके खेत या गमले की जड़ों के पास पानी रुका हुआ है, तो फंगस कुछ ही घंटों में जड़ों को सड़ा देती है। सच तो यह है कि बाजार की केमिकल वाली दवाइयां तेज बारिश में तुरंत धुल जाती हैं, जिससे आपका पैसा भी बर्बाद होता है और मिट्टी में रहने वाले अच्छे केंचुए भी मर जाते हैं।
इसलिए अपनी खेती के लिए बारिश के मौसम में फसलों में फंगस से बचाव कैसे करें का सही तरीका जानना बहुत जरूरी है। प्राकृतिक और जैविक उपाय पत्तियों पर एक ऐसी सुरक्षित परत बना देते हैं जिससे फंगस के कीटाणु वहां चिपक ही नहीं पाते। यह आपकी फसलों को बिना किसी जहर के मजबूत बनाने का सबसे अच्छा तरीका है।

खेत में पौधों को देखकर फसलों में फंगस की पहचान कैसे करें

कोई भी दवा छिड़कने से पहले आपको यह समझना होगा कि आपके पौधों को कौन सी बीमारी हुई है। शुरुआत में ही बीमारी को पकड़ लेने से उसे ठीक अगर आप नियमित रूप से अपने खेत का निरीक्षण करते हैं, तो फंगस की शुरुआती समस्या को समय रहते पकड़ना आसान हो जाता है। सबसे पहले पौधों की निचली पत्तियों पर ध्यान दें, क्योंकि संक्रमण अक्सर वहीं से शुरू होता है।
को देखें जो गीली मिट्टी के बिल्कुल पास होती हैं। अगर पत्तियों के ऊपर सफेद रंग का पाउडर जैसा दिख रहा है, या नीचे की तरफ मटमैले रंग का जाला बन रहा है, तो समझ जाइये कि फंगस का हमला हो चुका है। कभी-कभी पर्याप्त पानी मिलने के बाद भी पौधे अचानक मुरझाने लगते हैं और पत्तियां पीली पड़ जाती हैं।
एक और पक्का लक्षण यह है कि पौधे का तना जहां से मिट्टी से जुड़ा होता है, वहां काला या भूरा दाग दिखने लगता है। अगर आप बीमार पौधे को हल्के से खींचेंगे और उसकी जड़ें काली, पतली और बदबूदार लगेंगी, तो यह जड़ सड़ने की बीमारी है। इन इशारों को समय पर समझकर आप बाकी बची हुई फसल को तुरंत बचा सकते हैं।

मानसून के दिनों में आने वाले प्रमुख बारिश में फसलों के फंगल रोग

अलग-अलग फसलों पर बारिश के पानी और हवा का अलग-अलग असर होता है। इन बारिश में फसलों के फंगल रोग के बारे में जानकर आप सही समय पर सही इलाज कर सकते हैं।

कॉलर रॉट या जड़ का सड़ना

यह बीमारी मिर्च, टमाटर, बैंगन और गोभी जैसी सब्जियों के छोटे पौधों (नर्सरी) में सबसे ज्यादा आती है। इसमें छोटे पौधों का तना जमीन के पास से बिल्कुल पतला और कमजोर होकर गल जाता है, जिससे पौधा नीचे गिरकर मर जाता है। यह तब होता है जब क्यारियों में हवा का आना-जाना कम होता है और पानी भरा रहता है।

पत्ती झुलसा और डाउन मिल्ड्यू रोग

झुलसा रोग में पत्तियों पर बड़े-बड़े काले और भूरे रंग के धब्बे बन जाते हैं, जिससे पूरी पत्ती जलने जैसी दिखाई देने लगती है। डाउन मिल्ड्यू रोग में पत्ती के ऊपर पीले रंग के धब्बे दिखते हैं और पत्ती के पीछे रुई जैसा फंगस उग आता है। इससे पौधे धूप से अपना खाना नहीं बना पाते और उनकी बढ़त रुक जाती है।

बारिश के मौसम में फसलों में फंगस से बचाव कैसे करें

सबसे सस्ता इलाज: फसलों में फंगस का घरेलू उपचार

फसलों की शुरुआती बीमारी को ठीक करने के लिए आपको बाजार भागने की जरूरत नहीं है। हमारी पुरानी भारतीय खेती में ऐसे कई नुस्खे हैं जो घर की चीजों से ही फंगस को खत्म कर देते हैं। इस फसलों में फंगस का घरेलू उपचार को अपनाकर आप अपने पैसे भी बचा सकते हैं।
सबसे असरदार घरेलू तरीका है ताजी खट्टी छाछ या मट्ठा। दो लीटर छाछ को किसी तांबे के बर्तन में चार से पांच दिनों के लिए रख दें। तांबे के बर्तन में रखने से छाछ का खट्टापन तांबे के साथ मिलकर एक बहुत शक्तिशाली प्राकृतिक फफूंदनाशक (दवा) बन जाता है, जिसका रंग हल्का नीला या हरा होने लगता है।
अब इस दो लीटर खट्टी छाछ को चालीस लीटर साफ पानी में अच्छी तरह मिला लें। इस पानी को छानकर स्प्रे पंप की मदद से अपने पौधों पर छिड़कें। छाछ का खट्टापन फंगस को सांस लेने से रोकता है और पत्तियों को जरूरी ताकत भी देता है, जिससे पौधे फिर से मुस्कुराने लगते हैं।

घर पर जैविक फफूंदनाशक बनाने का तरीका स्टेप बाय स्टेप

अगर खेत में बीमारी ज्यादा फैली हुई दिख रही है, तो आप घर की कुछ कड़वी चीजों को मिलाकर एक मजबूत काढ़ा तैयार कर सकते हैं। यह जैविक फफूंदनाशक बनाने का तरीका बहुत आसान है और इसके लिए आपको कोई बाहरी खर्च नहीं करना पड़ेगा।

जरूरी सामान इकट्ठा करें

इसके लिए आपको एक किलो ताजी नीम की पत्तियां, आधा किलो धतूरे की पत्तियां और 200 ग्राम कच्चा लहसुन चाहिए। इन सभी चीजों में प्राकृतिक रूप से कड़वाहट और सल्फर होता है, जो फंगस और छोटे कीड़ों के बाहरी हिस्से को तुरंत गला देता है।

बनाने की विधि

इन सभी चीजों को सिलबट्टे पर या मिक्सर में पीसकर एक गाढ़ा पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट को दस लीटर पानी में डालकर तब तक उबालें जब तक पानी आधा यानी पांच लीटर न रह जाए। इसके बाद इसे रातभर ठंडा होने के लिए छोड़ दें और सुबह एक साफ कपड़े से छान लें।
जब भी छिड़काव करना हो, इस छने हुए गाढ़े काढ़े का एक लीटर हिस्सा लेकर उसमें दस लीटर सादा पानी मिलाएं। साथ में थोड़ा सा लिक्विड सोप या कपड़े धोने का साबुन मिला लें, ताकि यह दवा गीली पत्तियों पर अच्छे से चिपक जाए और हल्की बारिश में भी न छूटे।

बीमारी से पहले: फसलों में फंगल रोग से बचाव के उपाय

कहते हैं कि बीमारी का इलाज करने से बेहतर है कि बीमारी को आने ही न दिया जाए। इन बुनियादी फसलों में फंगल रोग से बचाव के उपाय को अपनाकर आप अपनी फसल को हमेशा सेहतमंद रख सकते हैं।
खेती का एक व्यावहारिक उदाहरण
जैसे अगर कोई किसान बारिश के दिनों में भिंडी की खेती कर रहा है। यदि वह बीजों को बहुत पास-पास बो देगा, तो घनी पत्तियों के कारण नीचे हमेशा सीलन बनी रहेगी और पूरी फसल फंगस से बर्बाद हो जाएगी। लेकिन अगर वह मेढ़ (उठी हुई क्यारी) बनाकर दो-दो फीट की दूरी पर बीज बोएगा और नीचे की पीली पत्तियों को काटता रहेगा, तो उसकी फसल में कभी फंगस नहीं लगेगी।

सुरक्षित खेती के लिए बारिश के मौसम में फसलों की देखभाल कैसे करें

बरसात के दिनों में अच्छी फसल काटने के लिए आपको हर दिन अपने खेत का ध्यान रखना होगा। इस बारिश के मौसम में फसलों की देखभाल की गाइड की मदद से आप अपनी खेती को सुरक्षित रख सकते हैं।
जब भी तेज बारिश थमे, सबसे पहले नालियों को चेक करें कि कहीं मिट्टी धंसने से पानी का रास्ता तो बंद नहीं हो गया है। जड़ों के पास रुका हुआ पानी पौधों का दम घोंट देता है, जिससे जड़ें कमजोर हो जाती हैं और फंगस आसानी से हमला कर देती है। अगर खेत में कोई पौधा बहुत ज्यादा सड़ चुका है, तो उसे तुरंत उखाड़कर खेत से दूर किसी गड्ढे में दबा दें ताकि उसकी बीमारी दूसरे पौधों में न फैले।
बादल छाए रहने के दौरान फसलों में ज्यादा यूरिया (नाइट्रोजन) डालने से बचें। ज्यादा यूरिया मिलने से पौधे बहुत कोमल और रसीले हो जाते हैं, जिन पर फंगस और कीड़े बहुत जल्दी हमला करते हैं। इसकी जगह मिट्टी पर सूखी लकड़ी की राख छिड़कें, जिसमें मौजूद पोटैशियम पौधों की बाहरी त्वचा को मजबूत बनाता है जिससे वे खराब मौसम को आसानी से झेल पाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
क्या रिमझिम बारिश के दौरान भी यह जैविक स्प्रे डाला जा सकता है?
नहीं, जब हल्की बूंदाबांदी भी हो रही हो तो स्प्रे न करें क्योंकि पानी दवा को तुरंत बहा ले जाएगा। हमेशा आसमान साफ होने का इंतजार करें और शाम के समय छिड़काव करें ताकि दवा को सूखने के लिए कम से कम 4 घंटे मिल सकें।
क्या ट्राइकोडर्मा पाउडर को घर के गमलों की मिट्टी में मिला सकते हैं?
हां, ट्राइकोडर्मा एक बहुत ही अच्छा और मित्र फंगस (मित्र फफूंद) है जो पौधों को नुकसान पहुंचाने वाले बुरे फंगस को चुन-चुनकर खा जाता है। यह घर के गमलों, केंचुओं और इंसानों के लिए बिल्कुल सुरक्षित है।
खट्टी छाछ का छिड़काव कितने दिनों के अंतर पर करना चाहिए?
जुलाई और अगस्त के महीनों में जब सबसे ज्यादा बारिश होती है, तब आपको हर 7 से 10 दिन में एक बार छाछ वाले पानी का छिड़काव जरूर करना चाहिए, भले ही आपकी फसल ऊपर से बिल्कुल साफ और तंदुरुस्त दिख रही हो।
टमाटर के पौधों की नीचे की पत्तियां काली क्यों पड़ रही हैं?
यह अर्ली ब्लाइट (अगेती झुलसा) नाम की फंगस के कारण होता है। जब तेज बारिश की बूंदें मिट्टी पर गिरती हैं, तो मिट्टी में छिपी फंगस उछलकर नीचे की पत्तियों पर लग जाती है। इससे बचने के लिए नीचे की पत्तियों को काट दें और नीम का स्प्रे करें।
क्या खाने वाले मीठे सोडे (Baking Soda) से भी फंगस ठीक होती है?
हां, एक लीटर पानी में एक छोटा चम्मच मीठा सोडा और कुछ बूंदें लिक्विड सोप मिलाकर स्प्रे करने से पत्तियों पर जमी सफेद फंगस (पाउडरी मिल्ड्यू) बहुत जल्दी साफ हो जाती है। यह घरेलू बागवानी के लिए बहुत अच्छा नुस्खा है।
Natural Conclusion
अपनी खेती को सुरक्षित रखने के लिए बारिश के मौसम में फसलों में फंगस से बचाव कैसे करें के इन आसान तरीकों को जानना हर किसान भाई के लिए बहुत जरूरी है। बाजार की महंगी और जहरीली केमिकल दवाओं को छोड़कर जब आप नीम, लहसुन और खट्टी छाछ जैसी घरेलू चीजों को अपनाते हैं, तो आपकी फसल भी शुद्ध रहती है और मिट्टी की उपजाऊ शक्ति भी बनी रहती है। फंगस का हमला होने का इंतजार बिल्कुल न करें। कल सुबह ही अपने खेत पर जाएं, जमा पानी को बाहर निकालें, घर पर खट्टी छाछ का यह आसान मिक्सचर तैयार करें और अपनी सुंदर फसलों को इस पूरे मानसून सुरक्षित रखें।

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