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बारिश के मौसम में फसलों में जड़ सड़न से बचाव कैसे करें

बारिश के मौसम में फसलों में जड़ सड़न से बचाव कैसे करेंबारिश के मौसम में फसलों में जड़ सड़न से बचाव कैसे करें

बरसात के आते ही चारों तरफ हरियाली तो छा जाती है, लेकिन इसके साथ ही खेतों में एक भयानक बीमारी भी दस्तक देती है। इस मौसम में लगातार पानी जमा होने से पौधों की जड़ें काली पड़कर गलने लगती हैं। आज हम बिल्कुल सरल भाषा में जानेंगे कि बारिश के मौसम में फसलों में जड़ सड़न से बचाव कैसे करें ताकि हमारी पूरी फसल बर्बाद होने से बच सके।
सबसे आसान बारिश के मौसम में फसलों में जड़ सड़न से बचाव कैसे करें, इसके लिए आपको खेत से पानी बाहर निकालने का रास्ता बनाना होगा। इसके साथ ही मिट्टी में ट्राइकोडर्मा नाम की मित्र फंगस मिलाना और खट्टी छाछ का इस्तेमाल करना सबसे बढ़िया रहता है। ये तरीके नुकसानदेह कीटाणुओं को खत्म करते हैं और पौधों की जड़ों को सांस लेने में मदद करते हैं।

जड़ सड़न रोग की पूरी जानकारी (Quick Summary)

जरूरी बातें काम की जानकारी
बीमारी का मुख्य कारण खेत में लगातार पानी जमा रहना और हवा की कमी
मुख्य लक्षण पत्तियां अचानक पीली पड़ना और जड़ का काला होना
सबसे अच्छा जैविक उपाय ट्राइकोडर्मा पाउडर और नीम की खली का मिश्रण
बेहतरीन घरेलू नुस्खा तांबे के बर्तन में रखी खट्टी छाछ का पानी
खेत का मुख्य नियम क्यारियों को ऊंचा बनाएं ताकि पानी जड़ों में न रुके

 (विषय सूची)
  1. मानसून में पौधों की जड़ें आखिर क्यों सड़ने लगती हैं?
  2. खेत में पौधों में जड़ सड़न रोग की पहचान कैसे करें
  3. नुकसान से बचने के लिए बारिश में जड़ सड़न का उपचार
  4. पूरी तरह सुरक्षित जैविक तरीके से जड़ सड़न का इलाज
  5. फसल की सुरक्षा के लिए फसलों में जड़ सड़न से बचाव के उपाय
  6. सुरक्षित खेती के लिए बारिश के मौसम में फसलों की देखभाल कैसे करें
  7. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल 

मानसून में पौधों की जड़ें आखिर क्यों सड़ने लगती हैं?

बरसात के दिनों में जब लगातार कई दिनों तक तेज पानी बरसता है, तो मिट्टी के अंदर मौजूद हवा के छोटे-छोटे छेद पानी से पूरी तरह भर जाते हैं। जब जड़ों को कई दिनों तक ऑक्सीजन नहीं मिलती, तो उनका दम घुटने लगता है। इसके बाद मिट्टी में रहने वाले बुरे फंगस (फफूंद) जड़ों पर हमला कर देते हैं।
यहां पर जड़ सड़न की समस्या अक्सर वहां शुरू होती है, जहां मिट्टी लंबे समय तक गीली रहती है। यदि खेत या गमले की मिट्टी में पानी जमा रहता है और वह बहुत भारी महसूस होती है, तो पौधों की जड़ों पर फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
जड़ें बहुत जल्दी काली होकर गल जाती हैं। सच तो यह है कि बाजार के रासायनिक पाउडर बारिश के तेज पानी में बह जाते हैं और उनका कोई असर नहीं होता।
इसलिए अपने बगीचे और खेत के लिए बारिश के मौसम में फसलों में जड़ सड़न से बचाव कैसे करें की सही समझ होना बेहद जरूरी है। सही और समय पर किए गए उपाय मिट्टी को अंदर से साफ करते हैं। इससे पौधों की जड़ें वापस मजबूत हो जाती हैं और नई पत्तियां आने लगती हैं।

खेत में पौधों में जड़ सड़न रोग की पहचान कैसे करें बारिश के मौसम में फसलों में जड़ सड़न से बचाव कैसे करें 

खेत में कोई भी दवा डालने से पहले आपको यह पक्का करना होगा कि आपके पौधे को यही बीमारी हुई है। कई बार लोग इसे आम कमजोरी समझकर यूरिया डाल देते हैं, जिससे नुकसान और बढ़ जाता है। सही तरीके से फसलों में जड़ सड़न रोग की पहचान करने के लिए पौधों की पत्तियों को ध्यान से देखें।
अगर आपके पौधे की ऊपर की पत्तियां अचानक पीली पड़ने लगी हैं और पूरी फसल नीचे की तरफ झुक रही है, तो सावधान हो जाएं। छूने पर पौधा बहुत कमजोर महसूस होगा और उसकी बढ़त पूरी तरह रुक जाएगी। पत्तियां बिना किसी कीड़े के भी अपने आप झड़ने लगती हैं।
बीमारी को पूरी तरह पक्का करने के लिए एक बीमार पौधे को धीरे से मिट्टी से बाहर निकालें। अगर उसकी जड़ें सफेद दिखने के बजाय मटमैली, भूरी या बिल्कुल काली पड़ चुकी हैं, तो समझ लें कि जड़ सड़न का हमला हो चुका है। ऐसी सड़ी हुई जड़ों से एक अजीब सी गंदी बदबू भी आती है।

नुकसान से बचने के लिए बारिश में जड़ सड़न का उपचार

अगर आपके खेत या गमले में यह बीमारी दिखना शुरू हो गई है, तो आपको तुरंत कदम उठाने होंगे। सबसे पहला काम यह करना है कि प्रभावित पौधों के आसपास की मिट्टी को थोड़ा खोदकर खुला छोड़ दें ताकि वहां धूप और हवा लग सके। सही समय पर barish me jad sadan ka upchar करने से बाकी बचे हुए पौधे पूरी तरह बच जाते हैं।
घरेलू तरीकों में सबसे कारगर नुस्खा है ताजी खट्टी छाछ या मट्ठा। दो लीटर एकदम खट्टी छाछ को पांच दिनों के लिए किसी तांबे के लोटे या बर्तन में रख दें। तांबे के असर से यह छाछ एक बेहतरीन प्राकृतिक फफूंदनाशक दवा बन जाती है।
अब इस दो लीटर खट्टी छाछ को तीस लीटर साफ पानी में अच्छी तरह घोल लें। इस तैयार पानी को बीमार पौधों की जड़ों के पास सीधे मिट्टी में डालें (इसे ड्रेंचिंग कहते हैं)। छाछ का खट्टापन मिट्टी के बुरे फंगस को तुरंत मार देता है और जड़ों को सड़ने से रोकता है।

पूरी तरह सुरक्षित जैविक तरीके से जड़ सड़न का इलाज

यदि बीमारी खेत में बड़े पैमाने पर फैल चुकी है, तो आपको वैज्ञानिक और प्राकृतिक तरीके का इस्तेमाल करना चाहिए। यह जैविक तरीके से जड़ सड़न का इलाज करने का सबसे बेस्ट और टिकाऊ तरीका माना जाता है।
इसके लिए आपको बाजार से ‘ट्राइकोडर्मा विरिडी’ (Trichoderma viride) नाम का पाउडर लाना होगा। यह एक तरह का मित्र फंगस है जो पौधों की जड़ों को सुरक्षा कवच देता है। यह मिट्टी में मौजूद हानिकारक फंगस को ढूंढ-ढूंढ कर खा जाता है।
एक किलो ट्राइकोडर्मा पाउडर को करीब 50 किलो सड़ी हुई गोबर की खाद या केंचुआ खाद (वर्मीकंपोस्ट) में अच्छे से मिला लें। इस मिक्सचर पर हल्का पानी छिड़क कर दो दिन के लिए किसी छांव वाली जगह पर ढक कर रख दें। इसके बाद इस खाद को पौधों की जड़ों के पास डाल दें, जिससे फंगस का नामोनिशान मिट जाएगा।

फसल की सुरक्षा के लिए फसलों में जड़ सड़न से बचाव के उपाय

बीमारी आने के बाद उसका इलाज करने से कहीं बेहतर है कि हम अपने खेत को पहले से ही सुरक्षित रखें। इन आसान फसलों में जड़ सड़न से बचाव के उपाय को अपनाकर आप अपने पौधों को मानसून के पूरे सीजन में बीमार होने से बचा सकते हैं।
एक छोटा सा उदाहरण
जैसे अगर आप अपने घर की छत पर टमाटर या मिर्च के पौधे गमले में लगा रहे हैं। यदि आपके गमले की मिट्टी बहुत सख्त होगी और उसके नीचे का छेद बंद होगा, तो पानी रुकने से जड़ें दो दिन में सड़ जाएंगी। लेकिन अगर आप मिट्टी में थोड़ी रेत मिलाएंगे और छेद को खुला रखेंगे, तो पानी तुरंत बाहर निकल जाएगा और पौधे हमेशा स्वस्थ रहेंगे।

सुरक्षित खेती के लिए बारिश के मौसम में फसलों की देखभाल कैसे करें

मानसून के महीनों में सफल बागवानी और खेती के लिए हर दिन पौधों की निगरानी करना बहुत जरूरी होता है। इस बारिश के मौसम में फसलों की देखभाल की छोटी सी गाइड की मदद से आप अपनी मेहनत को बचा सकते हैं।
जब भी तेज बारिश रुके, सबसे पहले अपने खेत के चारों तरफ बनी नालियों को साफ करें। कहीं भी पानी रुका हुआ नहीं दिखना चाहिए। मिट्टी के ऊपर जमी हुई काई या हरी परत को किसी खुरपी की मदद से खुरच कर हटा दें ताकि जमीन के अंदर हवा जा सके।
बरसात के दिनों में पौधों की जड़ों के पास सूखी लकड़ी की राख छिड़कना बहुत फायदेमंद होता है। राख में पोटैशियम होता है जो जड़ों को फंगस से लड़ने की ताकत देता है। इसके अलावा, बीमार पौधों की सड़ी हुई पत्तियों को काटकर खेत से दूर किसी गड्ढे में दबा देना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल 
क्या बारिश के पानी में ट्राइकोडर्मा पाउडर डालने से वह बह जाता है?
अगर आप पाउडर को सीधे ऊपर से छिड़केंगे तो वह बह सकता है। इसलिए हमेशा ट्राइकोडर्मा को गोबर की खाद में मिलाकर मिट्टी के अंदर दबाएं ताकि वह जड़ों के पास सुरक्षित रहकर अपना काम कर सके।
क्या गमले के पौधों में भी खट्टी छाछ का पानी डाल सकते हैं?
हां, यह घर के बागानों के लिए बिल्कुल सुरक्षित है। बस ध्यान रखें कि छाछ बहुत ज्यादा गाढ़ी न हो, उसे हमेशा पानी में अच्छे से पतला करके ही गमले की मिट्टी में डालना चाहिए।
बरसात में फसलों में कौन सी खाद डालने से बचना चाहिए?
बारिश के लगातार बादलों वाले दिनों में पौधों में ज्यादा यूरिया या कच्ची गोबर की खाद नहीं डालनी चाहिए। इससे मिट्टी में गर्मी और सीलन बढ़ती है, जिससे फंगस बहुत तेजी से पनपती है।
क्या हल्दी पाउडर से भी पौधों की जड़ों का सड़ना रुक सकता है?
हां, हल्दी में बहुत अच्छे एंटी-फंगल गुण होते हैं। अगर छोटे पौधों की जड़ों में सड़न की शुरुआत हुई है, तो एक चम्मच हल्दी पाउडर को पानी में मिलाकर जड़ों के पास डालने से आराम मिलता है।
बीजोपचार करना क्यों जरूरी माना जाता है?
बीज के ऊपर पहले से ही कई तरह के फंगस के कीटाणु चिपके हो सकते हैं। जब हम बोने से पहले बीजों को साफ करते हैं, तो वे कीटाणु मर जाते हैं और उगने वाले नए पौधे की जड़ें बिल्कुल स्वस्थ रहती हैं।
Natural Conclusion
अपनी फसलों और पौधों को बचाने के लिए बारिश के मौसम में फसलों में जड़ सड़न से बचाव कैसे करें के इन आसान तरीकों को समझना बेहद जरूरी है। रासायनिक दवाओं के महंगे खर्च को छोड़कर जब आप खट्टी छाछ, लकड़ी की राख और ट्राइकोडर्मा जैसे देसी व जैविक तरीकों को चुनते हैं, तो आपकी मिट्टी की सेहत भी बनी रहती है और फसल भी भरपूर मिलती है। फंगस का हमला होने का इंतजार बिल्कुल न करें। आज ही अपने बगीचे या खेत में जाएं, पानी निकलने का रास्ता साफ करें, घर पर यह आसान जैविक खाद तैयार करें और इस पूरे मानसून अपनी फसलों को हरा-भरा और सुरक्षित रखें।
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