तुअर की उन्नत खेती कैसे करें शुरुआत से अंत तक की पूरी जानकारी
भारत के शाकाहारी भोजन में दालों का एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। दलहनी फसलों में अरहर यानी तुअर को सबसे मुख्य और मुनाफे वाली फसल माना जाता है। सही तकनीक की कमी के कारण अक्सर हमारे किसान भाइयों की लागत बढ़ जाती है और पैदावार बहुत कम रह जाती है। अगर आप भी इस सीजन में बंपर मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो यह विस्तृत गाइड आपके लिए है। इस लेख में हम वैज्ञानिक तरीकों से तुअर की उन्नत खेती कैसे करें शुरुआत से अंत तक की पूरी जानकारी आसान शब्दों में समझेंगे।
तुअर की खेती का त्वरित तरीका
कम लागत में अधिक पैदावार लेने के लिए तुअर की उन्नत खेती कैसे करें शुरुआत से अंत तक की पूरी जानकारी का पालन करना बहुत जरूरी है। इसके लिए आप जून-जुलाई के महीने में उन्नत बीजों का चयन करें। सही दूरी पर बुवाई करें, संतुलित मात्रा में यूरिया-डीएपी के साथ सल्फर खाद का उपयोग करें, और फलियों को इल्ली से बचाने के लिए सही समय पर कीटनाशक का छिड़काव करें।
तुअर की उन्नत खेती कैसे करें शुरुआत से अंत तक की पूरी जानकारी
त्वरित सारांश
कम समय में बेहतर प्लानिंग के लिए तुअर की खेती का पूरा टाइम-शेड्यूल यहाँ समझें:
- बीज का चुनाव: हमेशा सरकारी कृषि केंद्रों या प्रामाणिक डीलरों से ही उन्नत और हाइब्रिड बीज खरीदें।
- बीज उपचार: बोनी करने से पहले फफूंदनाशक दवा और राइजोबियम कल्चर से बीजों को जरूर उपचारित करें।
- खेत की तैयारी: पानी के निकास के लिए खेत को समतल करें और आखिरी जुताई में अच्छी सड़ी गोबर की खाद मिलाएं।
- कीट सुरक्षा: फलियां बनते समय नीम के तेल या अनुशंसित दानेदार कीटनाशक का सही समय पर स्प्रे करें।
विषय सूची
- सही शुरुआत: तुअर की खेती कैसे करें?
- बीज चयन: तुअर की उन्नत किस्में कौन सी हैं?
- समय का गणित: तुअर की बुवाई का सही समय
- पोषण प्रबंधन: तुअर की खेती में खाद और उर्वरक
- फसल सुरक्षा: तुअर की फसल में कीट और रोग नियंत्रण
- फसल की कटाई और भंडारण के नियम
- अक्सर पूछे जाने वाले 5 जरूरी सवाल
सही शुरुआत: तुअर की खेती कैसे करें?
दालों की फसलों के साथ सबसे अच्छी बात यह होती है कि ये हवा से नाइट्रोजन सोखकर जमीन की उपजाऊ शक्ति को बढ़ाती हैं। लेकिन इसके लिए सही जमीन और खेत की तैयारी बहुत जरूरी है।
अगर आप सोच रहे हैं कि तुअर की खेती कैसे करें, तो सबसे पहले बलुई दोमट या भारी काली मिट्टी वाले खेत का चुनाव करें। खेत में पानी रुकना नहीं चाहिए, क्योंकि जलभराव से पौधे सड़ जाते हैं। खेत की दो बार गहरी जुताई करें और रोटावेटर चलाकर मिट्टी को भुरभुरा बना लें।
बीज चयन: तुअर की उन्नत किस्में कौन सी हैं?
कम दिनों में पकने वाली और बीमारियों से लड़ने वाली वैरायटी का चुनाव करना ही समझदारी है। सही बीज आपके पूरे मुनाफे को तय करता है।
बाजार में तुअर की उन्नत किस्में बहुत सारी उपलब्ध हैं, जिन्हें आप अपनी जमीन के हिसाब से चुन सकते हैं। अगर आप कम समय (140-160 दिन) वाली वैरायटी चाहते हैं, तो ‘पूसा 992’ या ‘आईसीपीएल 87’ बेस्ट हैं। लंबे समय (180-200 दिन) के लिए ‘बहार’ या ‘आशा (ICPL 87119)’ किस्में सबसे ज्यादा पैदावार देती हैं, क्योंकि इनमें उख्टा रोग नहीं लगता।
समय का गणित: तुअर की बुवाई का सही समय
देरी से बोनी करने पर पौधों का विकास रुक जाता है और ठंड के मौसम में फलियों पर कीड़ों का हमला बहुत बढ़ जाता है।
इसलिए तुअर की बुवाई का सही समय जून के आखिरी हफ्ते से लेकर जुलाई के पहले पखवाड़े तक माना जाता है। जैसे ही मानसून की पहली अच्छी बारिश हो जाए, खेत में नमी देखकर बोनी कर देनी चाहिए। कतार से कतार की दूरी 60 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 20 सेंटीमीटर रखना सबसे सही होता है।
पोषण प्रबंधन: तुअर की खेती में खाद और उर्वरक
चूंकि यह दलहनी फसल है, इसलिए इसे नाइट्रोजन की बहुत ज्यादा जरूरत नहीं होती, लेकिन सल्फर और फास्फोरस इसके लिए अमृत समान हैं।
मिट्टी की जांच के बाद ही तुअर की खेती में खाद और उर्वरक का सही डोज तय करें। सामान्य तौर पर बोनी के समय एक एकड़ खेत में 20 किलो यूरिया, 50 किलो डीएपी और 10 किलो सल्फर देना चाहिए। सल्फर डालने से दाल में प्रोटीन की मात्रा बढ़ती है और दानों में बहुत अच्छी चमक आती है।
फसल की जादुई तकनीक: 2G और 3G कटिंग का तरीका
अधिक मुनाफा कमाने के लिए पौधों में ज्यादा से ज्यादा शाखाओं (Branches) का होना बहुत जरूरी है, ताकि ज्यादा फलियां लग सकें।
जब आपका तुअर का पौधा लगभग 45 से 50 दिन का हो जाए, तो उसके सबसे ऊपरी मुख्य हिस्से (Top tip) को उंगलियों से थोड़ा सा तोड़ दें। इसे ‘पिंचिंग’ या ‘टॉपिंग’ तकनीक कहते हैं। ऐसा करने से पौधा सीधा लंबा नहीं भागेगा, बल्कि नीचे से कई नई मजबूत शाखाएं निकलेंगी, जिससे फलियों की संख्या दोगुनी हो जाएगी।
फसल सुरक्षा: तुअर की फसल में कीट और रोग नियंत्रण
इस फसल के दो सबसे बड़े दुश्मन हैं—जड़ों में लगने वाला उख्टा रोग (Wilt) और फलियों को खाने वाली फली छेदक इल्ली (Pod Borer)।
समय पर तुअर की फसल में कीट और रोग नियंत्रण न करने से पूरी मेहनत बेकार हो सकती है। उख्टा रोग से बचने के लिए बीज को ‘ट्राइकोडेर्मा’ से उपचारित करके ही बोएं। फलियों में इल्ली दिखने पर शुरुआती स्टेज में नीम के तेल (Neem Oil) का स्प्रे करें। अगर हमला बहुत ज्यादा हो, तो ‘इमामेक्टिन बेंजोएट’ या ‘कोराजन’ दवा का छिड़काव 200 लीटर पानी में मिलाकर करें।
फसल की कटाई और भंडारण के नियम
जब पौधे की पत्तियां झड़ जाएं और फलियां भूरे रंग की होकर सूख जाएं, तब फसल की कटाई कर लेनी चाहिए।
कटाई के बाद पौधों के बंडल बनाकर धूप में 3-4 दिन अच्छे से सुखाएं। थ्रेशर की मदद से दानों को अलग कर लें। भंडारण करने से पहले दाल के दानों को धूप में इतना सुखाएं कि उनमें नमी केवल 8 से 10% ही बचे। नमी रहने पर घुन (कीड़े) लगने का खतरा सबसे ज्यादा होता है।
5 जरूरी सवाल
Q1. तुअर की फसल में पहली सिंचाई कब करनी चाहिए?
अगर बारिश नियमित हो रही है तो पानी देने की जरूरत नहीं है, लेकिन फूल आने और फलियां बनते समय अगर सूखा पड़े, तो हल्की सिंचाई जरूर करें।
अगर बारिश नियमित हो रही है तो पानी देने की जरूरत नहीं है, लेकिन फूल आने और फलियां बनते समय अगर सूखा पड़े, तो हल्की सिंचाई जरूर करें।
Q2. एक एकड़ खेत के लिए कितना तुअर का बीज काफी होता है?
उन्नत और वैज्ञानिक विधि से खेती करने के लिए एक एकड़ खेत में लगभग 4 से 5 किलोग्राम साफ सुथरा बीज पर्याप्त होता है।
उन्नत और वैज्ञानिक विधि से खेती करने के लिए एक एकड़ खेत में लगभग 4 से 5 किलोग्राम साफ सुथरा बीज पर्याप्त होता है।
Q3. क्या हम तुअर के साथ कोई दूसरी फसल भी उगा सकते हैं?
हाँ, इसे अंतरवर्तीय खेती (Intercropping) कहते हैं। आप तुअर की दो कतारों के बीच में सोयाबीन, मक्का या मूंगफली लगाकर दोहरा लाभ कमा सकते हैं।
हाँ, इसे अंतरवर्तीय खेती (Intercropping) कहते हैं। आप तुअर की दो कतारों के बीच में सोयाबीन, मक्का या मूंगफली लगाकर दोहरा लाभ कमा सकते हैं।
Q4. तुअर का पौधा अचानक ऊपर से सूखने लगे तो क्या करें?
यह उख्टा (Wilt) रोग हो सकता है। इससे बचने के लिए ग्रसित पौधों को उखाड़कर जला दें और खेत में पानी को बिल्कुल भी जमा न होने दें।
यह उख्टा (Wilt) रोग हो सकता है। इससे बचने के लिए ग्रसित पौधों को उखाड़कर जला दें और खेत में पानी को बिल्कुल भी जमा न होने दें।
Q5. एक एकड़ में तुअर की औसतन पैदावार कितनी हो जाती है?
अगर आपने अच्छी किस्म के बीजों का उपयोग किया है और सही से देखभाल की है, तो एक एकड़ में 7 से 10 क्विंटल तक की पैदावार आराम से मिल जाती है।
अगर आपने अच्छी किस्म के बीजों का उपयोग किया है और सही से देखभाल की है, तो एक एकड़ में 7 से 10 क्विंटल तक की पैदावार आराम से मिल जाती है।
निष्कर्ष
कम पानी और साधारण देखरेख में भी भारी मुनाफा कमाने के लिए अरहर की फसल सबसे बेस्ट है। बस आपको सही समय पर बुवाई, संतुलित खाद और इल्ली से सुरक्षा का ध्यान रखना होगा। हमें उम्मीद है कि आपको तुअर की उन्नत खेती कैसे करें शुरुआत से अंत तक की पूरी जानकारी पसंद आई होगी। अपनी फसल की सुरक्षा के लिए हमारे पुराने लेख [मक्का की फसल में फॉल आर्मीवर्म कीट का इलाज] को भी जरूर पढ़ें। खेती से जुड़ी अधिक सरकारी योजनाओं और बीज सब्सिडी की प्रामाणिक जानकारी के लिए आप भारत सरकार के आधिकारिक किसान कल्याण पोर्टल (कृषि मंत्रालय) पर जा सकते हैं और कृषि वैज्ञानिक सलाह के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की वेबसाइट को फॉलो कर सकते हैं