मक्का के भुट्टों में दानों का पूरा भराव और वजन बढ़ाने का तरीका
मक्का के भुट्टों में दानों का पूरा भराव और वजन बढ़ाने का तरीका: मक्का की खेती में पौधों की अच्छी लंबाई और गहरे हरे पत्ते देखकर हर किसान का दिल खुश हो जाता है। लेकिन आपकी इस पूरी मेहनत का असली फैसला तब होता है जब पौधों पर भुट्टे आना शुरू होते हैं।
मक्का के भुट्टों में दानों का पूरा भराव और वजन बढ़ाने का तरीका समझकर आप अपनी फसल से रिकॉर्ड तोड़ उत्पादन ले सकते हैं। अगर भुट्टा बनते समय पौधों को सही पोषण और सही मात्रा में नमी नहीं मिलती, तो भुट्टे के आखिरी छोर के दाने पूरी तरह खाली रह जाते हैं जिससे मंडी में आपको बहुत कम भाव मिलता है।
भुट्टा बनते समय पोषण की कमी क्यों भारी पड़ती है?
जब मक्का की फसल में सिल्क या बाल निकलने की अवस्था आती है, तो पौधों को अपने दानों में स्टार्च और दूध भरने के लिए अत्यधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इस नाजुक समय पर केवल साधारण यूरिया डालने से काम नहीं चलता, बल्कि कुछ खास पोषक तत्वों का छिड़काव करना पड़ता है।
यह गाइड आपको बिना किसी उलझन के बहुत ही आसान शब्दों में भुट्टों का आकार और वजन बढ़ाने की पूरी वैज्ञानिक तकनीक समझाएगी। इन छोटे-छोटे और बेहद किफायती उपायों को अपनाकर आप अपने खेत से निकलने वाली मक्का की गुणवत्ता को बहुत शानदार बना सकते हैं।
फसल की बेहतर पैदावार के लिए मुख्य बिंदु
भुट्टों में दानों का वजन बढ़ाने के लिए आपको फसल की दो मुख्य अवस्थाओं पर विशेष ध्यान देना होगा। पहली अवस्था है जब भुट्टे से बाल (सिल्क) बाहर आते हैं और दूसरी अवस्था है जब दानों में दूध भरना (मिलकिंग स्टेज) शुरू होता है।
इन दोनों ही समय पर खेत में पर्याप्त नमी का होना और पत्तों के माध्यम से सही खादों का छिड़काव करना सबसे ज्यादा असरदार साबित होता है। अगर आप इन दिनों में मिट्टी को सूखा छोड़ देते हैं, तो दानों का विकास वहीं रुक जाता है और भुट्टे छोटे रह जाते हैं।
मक्का के भुट्टों में दानों का पूरा भराव और वजन बढ़ाने का तरीका
विषय सूची
- मक्का के भुट्टे खाली रहने का कारण और मुख्य वजहें
- मक्का में बोरॉन खाद के फायदे और इस्तेमाल की विधि
- मक्का की फसल में पोटाश कब डालें: सही समय की पहचान
- मक्का का भुट्टा बड़ा करने की दवा और बेहतरीन टॉनिक
- आधुनिक तरीके से मक्का की पैदावार बढ़ाने के उपाय
- दाना भरते समय किसान भाई कौन सी बड़ी गलतियां न करें
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल और उनके सही जवाब
मक्का के भुट्टे खाली रहने का कारण और मुख्य वजहें
कई बार किसान शिकायत करते हैं कि उनके खेत में भुट्टे तो बहुत बड़े दिख रहे हैं, लेकिन छिलका हटाने पर अंदर दाने बहुत कम या बिखरे हुए मिलते हैं। वैज्ञानिक भाषा में इस समस्या को अनफिल्ड कॉब कहा जाता है, जो मुख्य रूप से खराब परागण (Pollination) के कारण होता है।
इसके अलावा मक्का के भुट्टे खाली रहने का कारण मिट्टी में जिंक, बोरॉन और पोटेशियम जैसे आवश्यक सूक्ष्म तत्वों की भारी कमी होना भी है। जब बालियां निकलते समय खेत में पानी का सूखा पड़ता है या लगातार तेज बारिश से नाइट्रोजन बह जाती है, तब भी दाने आधे-अधूरे ही बनते हैं।
मक्का में बोरॉन खाद के फायदे और इस्तेमाल की विधि
बोरॉन एक ऐसा सूक्ष्म पोषक तत्व है जो पौधों में परागकणों को मजबूत बनाता है जिससे भुट्टे के निचले हिस्से से लेकर आखिरी नोक तक एक-एक दाना बराबर भरता है। यह दानों की कोशिकाओं के विकास में मदद करता है जिससे दानों में सिकुड़न नहीं आती।
खेत में मक्का में बोरॉन खाद के फायदे लेने के लिए आपको भुट्टा आने से ठीक पहले बोरॉन 20% की 200 ग्राम मात्रा को प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़कना चाहिए। इसे 150 लीटर पानी में अच्छी तरह मिलाकर साफ धूप वाले दिन पत्तों पर स्प्रे करने से भुट्टों का खाली रहना पूरी तरह बंद हो जाता है।
मक्का की फसल में पोटाश कब डालें: सही समय की पहचान
पोटेशियम या पोटाश पौधों के तने को मजबूत करने के साथ-साथ दानों के अंदर स्टार्च की मात्रा को बढ़ाता है जिससे दानों का वजन और उनकी प्राकृतिक चमक बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। बहुत से किसान भाई बुवाई के समय पोटाश डालना भूल जाते हैं, जिससे फसल बाद में कमजोर रह जाती है।
अगर आप शुरुआत में पोटाश नहीं दे पाए थे, तो जानिए कि मक्का की फसल में पोटाश कब डालें ताकि तुरंत असर हो। जब मक्का में गूलर या भुट्टा बनना शुरू हो, तब एनपीके 0:0:50 (सल्फेट ऑफ पोटाश) की 1 किलोग्राम मात्रा को प्रति एकड़ 150 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करना सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।
मक्का का भुट्टा बड़ा करने की दवा और बेहतरीन टॉनिक
देहात के इलाकों में किसान भाई अक्सर किसी ऐसे चमत्कारिक घोल या स्प्रे की तलाश में रहते हैं जो भुट्टों के साइज को रातों-रात दोगुना कर दे। बाजार में किसी भी नकली और महंगे जादुई टॉनिक के चक्कर में पड़ने के बजाय आपको वैज्ञानिक दवाओं का चुनाव करना चाहिए।
असल में मक्का का भुट्टा बड़ा करने की दवा कोई अलग रसायन नहीं, बल्कि अमीनो एसिड और सीवीड (समुद्री शैवाल) पर आधारित प्लांट ग्रोथ प्रमोटर होते हैं। भुट्टे निकलने की शुरुआती अवस्था में किसी अच्छे ब्रांड के ग्रोथ रेगुलेटर को एनपीके के साथ मिलाकर स्प्रे करने से पौधों का आंतरिक विकास बहुत तेजी से सुधरता है।
आधुनिक तरीके से मक्का की पैदावार बढ़ाने के उपाय
अपनी फसल से बंपर पैदावार लेने के लिए आपको पारंपरिक खेती के तौर-तरीकों को छोड़कर थोड़ा आधुनिक और स्मार्ट बनना पड़ेगा। केवल नाइट्रोजन यानी यूरिया खाद के भरोसे रहने से कभी भी दानों का वजन भारी नहीं किया जा सकता।
बेहतरीन मक्का की पैदावार बढ़ाने के उपाय में शामिल है कि आप बुवाई के समय सही हाइब्रिड बीजों का चुनाव करें और खेत में जैविक कंपोस्ट का प्रयोग बढ़ाएं। भुट्टा आते समय खेत से सभी प्रकार के खरपतवारों को पूरी तरह साफ रखें ताकि सारा पोषण केवल आपके भुट्टों को ही मिले।
दाना भरते समय किसान भाई कौन सी बड़ी गलतियां न करें
एक सबसे बड़ी गलती जो बहुत से किसान भाई करते हैं, वह है भुट्टों में दाना भरते समय खेत की सिंचाई रोक देना। इस समय पौधों की जड़ों को पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, अगर इस दौरान मिट्टी कड़क हो गई तो दानों का साइज बहुत छोटा रह जाएगा।
छिड़काव करते समय कभी भी तेज दोपहर की धूप में स्प्रे न करें, इससे पत्तों पर सफेद धब्बे पड़ सकते हैं और दवा का असर आधा हो जाता है। हमेशा सुबह 11 बजे से पहले या शाम को 4 बजे के बाद ही खादों का स्प्रे करें और सिलिकॉन आधारित चिपको (स्टीकर) मिलाना बिल्कुल न भूलें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल और उनके सही जवाब
क्या हम पोटाश और बोरॉन को एक साथ मिलाकर मक्का पर स्प्रे कर सकते हैं?
हां, एनपीके 0:0:50 और बोरॉन 20% को एक साथ एक ही पानी की टंकी में मिलाकर स्प्रे करना पूरी तरह सुरक्षित और ज्यादा असरदार होता है।
हां, एनपीके 0:0:50 और बोरॉन 20% को एक साथ एक ही पानी की टंकी में मिलाकर स्प्रे करना पूरी तरह सुरक्षित और ज्यादा असरदार होता है।
मक्का के भुट्टों में चमक बढ़ाने के लिए कौन सा तत्व सबसे जरूरी है?
दानों की प्राकृतिक पीली चमक और उनकी मोटाई बढ़ाने के लिए पोटाश (पोटेशियम) सबसे मुख्य और जरूरी तत्व माना जाता है।
दानों की प्राकृतिक पीली चमक और उनकी मोटाई बढ़ाने के लिए पोटाश (पोटेशियम) सबसे मुख्य और जरूरी तत्व माना जाता है।
यदि बालियां निकलते समय लगातार बारिश हो रही हो तो क्या करें?
लगातार बारिश के दौरान खेत में पानी जमा न होने दें, क्योंकि जलभराव से परागण की प्रक्रिया खराब हो जाती है और भुट्टे खाली रह जाते हैं।
लगातार बारिश के दौरान खेत में पानी जमा न होने दें, क्योंकि जलभराव से परागण की प्रक्रिया खराब हो जाती है और भुट्टे खाली रह जाते हैं।
क्या जिंक सल्फेट का इस्तेमाल इस समय किया जा सकता है?
अगर पत्तियों में पीलापन है, तो आप चिलेटेड जिंक (Zinc EDTA 12%) की 100 ग्राम मात्रा का छिड़काव पोटाश के साथ मिलाकर कर सकते हैं।
अगर पत्तियों में पीलापन है, तो आप चिलेटेड जिंक (Zinc EDTA 12%) की 100 ग्राम मात्रा का छिड़काव पोटाश के साथ मिलाकर कर सकते हैं।
स्प्रे करने के कितने घंटे बाद तक बारिश नहीं होनी चाहिए?
दवा छिड़कने के कम से कम 2 से 3 घंटे तक मौसम साफ रहना चाहिए ताकि पत्तियां पोषक तत्वों को अच्छी तरह सोख सकें।
दवा छिड़कने के कम से कम 2 से 3 घंटे तक मौसम साफ रहना चाहिए ताकि पत्तियां पोषक तत्वों को अच्छी तरह सोख सकें।
निष्कर्ष
मक्का की फसल से रिकॉर्ड तोड़ मुनाफा कमाने का असली राज भुट्टों की सही समय पर की गई देखरेख में ही छुपा हुआ है। सही अवस्था पर संतुलित मात्रा में पोटाश और बोरॉन देना ही इस खेती का सबसे बड़ा जादुई फॉर्मूला है।
आशा है कि मक्का के भुट्टों में दानों का पूरा भराव और वजन बढ़ाने का तरीका समझकर आप अपनी फसल को और अधिक शानदार बनाएंगे। आज ही अपने खेत का निरीक्षण करें, मिट्टी में नमी की जांच करें और जरूरत के अनुसार तुरंत एनपीके और बोरॉन के स्प्रे का इंतजाम करें।